कोरोना काल में इतिहास रचने की तैयारी मजदूर वर्ग के युवा कर रहे हैं भूखों की सेवा

कोरोना काल में इतिहास रचने की तैयारी मजदूर वर्ग के युवा कर रहे हैं भूखों की सेवा

संवाददाता-बबलु कुमार !

NEWSTODAYJ:बोकारो।  वर्तमान समय पूरा मानव समुदाय एक अदृश्य दुश्मन से लड़ रहा है इस अदृश्य दुश्मन को कोविड-19 नाम से जाना जाता है यह कोविड-19 नामक शत्रु पूरी मानव जाति पर बड़ा खतरा बन कर सामने आ रहा है इस संक्रमण ने बड़े-बड़े सुपर शक्ति कहे जाने वाले अमेरिका जैसे देशों को भी घुटनों के बल चलने को मजबूर कर दिया है, लेकिन भारत और भारत वासी के हौसला ने इस अदृश्य संक्रमण को बड़ी सहजता से काबू करने का काम किया और कर रहे हैं. इस महामारी काल में जहां प्रशासन सारी व्यवस्था चाक-चौबंद होने का दावा कर रही है वहीं कुछ जगह ऐसे भी हैं

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जहां प्रशासन अभी तक पहुंच नहीं पाई और ना ही किसी तरह की सुविधा पहुंचा पाई ,किंतु उन जगहों पर जहां प्रशासन हर सुविधा नहीं पहुंचा पाती या यूं कहें कि लोग सुविधा तक नहीं पहुंच पाते वहां कुछ युवाओं ने जो मजदूर वर्ग के हैं  इतिहास रचने का काम किया।  अब आप कहेंगे इतिहास तो इतिहास इसलिए कि यह युवा खुद तो मजदूर वर्ग से हैं ,लेकिन इनके हौसले को देख कर  आप कह नहीं सकते  कि यह मजदूर वर्ग के युवा हैं उनका काम देखने से आपको ऐसा प्रतीत होगा कि यह किसी राजा महाराजा  के घराने से संबंध रखने वाले युवा हैं मात्र 2 लोग ऐसे हैं नीरज शाह और शंकर पान जो वहां भूखों के बीच भोजन परोसा जाता है उन भोजन को बनाने के लिए अनाज का व्यवस्था करते हैं बाकी जो मजदूर वर्ग के युवा हैं  वह लोग श्रमदान कर भोजन को तैयार करते हैं और फिर गरीब गुरबा भूखों के बीच उस भोजन को सामाजिक दूरी रखते हुए लॉक डाउन के नियमों का पालन करते हुए परोसने का काम करते हैं. ये काम कर्मिडिह केबिन टोला में कुछ युवा मजदूर लोगों ने गरीब भूखे लोगों के बीच भोजन वितरण कर सराहनीय काम किया इस कार्य को करने  वाले युवाओं को निरंतर 3 अप्रैल से सैकड़ों भूखे लोगों के बीच भोजन वितरण का प्रोग्राम तो लोगों ने यह सोचकर बनाया था कि दो-चार दिन बाद सरकारी सुविधा लोगों को मिल जाएगी। मगर ऐसा हुआ नहीं तो नीरज साह और शंकर पान लॉक डाउन की वजह से जो मजदूर घर पर बैठे थे उन नौजवानों को संगठित कर इस कार्य को लगातार जारी रखने का निर्णय लियाइधर उधर से चंदा मांग कर लोग भूखों को भोजन करा रहे हैं मगर उनको सरकारी मदद की आशा है लोग कहते हैं कि अगर इस क्षेत्र में हम लोग भोजन नहीं उपलब्ध करा पाएंगे तो एक बड़ा जनसमूह भूखा सोने को मजबूर हो जाएगा। इसलिए अब जिला प्रशासन इस क्षेत्र पर निगाह डालें और उन युवाओं का भी ध्यान रखें जो मजदूर वर्ग के होकर भी राजा वाला काम करने का हौसला रखते हैं .इस कार्य में मुख्य रूप से नीरज साह, शंकर पान व्यवस्थापक का काम कर रहे हैं  और टीम के रूप में जो श्रमदान करने वालों में मोटका गोप ,लोबो सरदार ,कार्तिक गोप, कमल किशोर दास ,तूफान पान, सोनू प्रसाद, रतनलाल गोप, सत्येंद्र साह  व अनिल शाह हैं।

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