किसान ने अपने खेतों से 15 करोड़ कमाए

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न्यूज टुडे



नई दिल्ली। सरकार कई तरह के मिशन को अंजाम देने में लगी हुई है कि किसानों की हालत बढ़िया हो सके। सरकार का कदम वाकई में सराहनीय है लेकिन इस बीच गुजरात के किसान अपनी खेती के साथ प्रयोग करने में सबसे आगे रह रहे हैं। भरूच के पास अलवा गांव के अल्केश पटेल ने पहली बार राज्य में चंदन की खेती करने की ठानी।

सूरत से करीब 70 किलोमीटर दूर छोटे से गांव अलवा में रहने वाले अल्केश भाई पटेल ने जब पहली बार अपनी खेती-बाड़ी के साथ कुछ नया करने की सोची तो आगे की राह इतनी आसान नहीं थी।

दरअसल, अल्केश ने करीब 15 साल पहले अपने खेतों में 10 लाख रुपए का निवेश किया था जिसकी वजह से उनकी फसल की कीमत आज के समय में 15 करोड़ रुपए हैं। यानी की इसमें सीधा सीधा 150 गुना का फायदा अल्पेश को हुआ है। 2003 में गुजरात में सरकार ने किसानों को चंदन की खेती करने की इजाजत तो दे दी, लेकिन नए मौसम और नए माहौल में अपने खेत पर चंदन की खेती का खतरा कौन उठाए, अल्पेश ने ये जोखिम उठाने की सोची।

अल्केश ने करीब 5 एकड़ जमीन पर 1,000 चंदन के पेड़ लगा दिए, लेकिन शुरुआत में फसल खराब हो गई। मदद के लिए राज्य के कृषि अनुसंधान संस्थान ने खुद अल्पेश के साथ आकर उनकी फसल पर शोध करने का फैसला लिया। चंदन की खेती को तैयार होने में 15 से 20 साल का वक्त लगता है और यही वजह है कि कई किसान इतना इंतजार नहीं कर पाते। लेकिन पकने के बाद एक किलो चंदन की लकड़ी के लिए 10 से 12 हजार रुपए मिल जाते हैं। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए परेशान नहीं होना है। राज्य सरकार ने चंदन को बेचने और एक्सपोर्ट करने तक की जिम्मेदारी ले रखी है।

अब जो किसान चंदन की खेती नहीं कर पाए उन्होंने नीलगिरी की खेती शुरू कर दी। नीलगिरी की लकड़ी से भी किसानों को काफी फायदा हो रहा है। अल्पेश को राज्य में सर्वश्रेष्ठ किसान का खिताब मिल चुका है और वे दक्षिण गुजरात में हजारों किसानों के लिए एक प्रेरणा हैं।

newstodayjharkhand@gmail.com

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