• झारखंड का उभरता न्यूज़ पोट्रल न्यूज़ टुडे झारखंड में आप के गली मोहलले के हर खबर अब आप के मोबाइल तक आप के गली मोहल्ले की हर खबर को हम दिखाएंगे प्रमुखता से हमारे न्यूज़ टुडे झारखंड के संवादाता से संपर्क करे,ph..No धनबाद, 9386192053,9431143077,93 34 224969,बोकारो,+91 87899 12448,लातेहार,+919546246848,पटना,+919430205923,गया,9939498773,रांची,+919334224969,हेड ऑफिस दिल्ली,+919212191644,आप हमें ईमेल पर भी संपर्क कर सकते है हमारा ईमेल है,NEWSTODAYJHARKHAND@GMAIL........झारखंड के हर कोने कोने की खबर अब आप के मोबाइल तक सबसे पहले आप प्ले सटोर पर भी न्यूज़ टुडे झारखंड के ऐप को इंस्टॉल कर सकते है हर तरह के वीडियो देखने के लिए सब्सक्राइब करे यूट्यूब पर NEWSTODAYJHARKHAND......विज्ञापन के लिए संपर्क करे...9386192053.9431134077

उत्तरी भारत में तेजी से घट रहा है भूजल स्तर

1 min read

हैदराबाद।

उत्तरी भारत में तेजी से घट रहा है भूजल स्तर

हैदराबाद । कहते है जल ही जीवन है पर भारत के उत्तरी क्षेत्र में सबसे अधिक तेजी से भूजल का स्तर घट रहा है। यह बात का खुलासा एक नई अध्ययन से हुआ है। तेजी से बढ़ रही इस समस्या का केंद्र दिल्ली है। Related imageनेशनल जिओफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनजीआरआई) के डायरेक्टर विजेंद्र एम तिवारी ने कहा, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी से लेकर राजस्थान तक हर साल 32 क्यूबिक किलोमीटर (1 क्यूबिक किलोमीटर 1 खरब लीटर के बराबर होता है) पानी खर्च हो रहा है। यह मात्रा सामान्य से ज्यादा है और मॉनसून के दौरान आंशिक रूप से ही इसकी भरपाई हो पाती है।

विजेंद्र तिवारी के मुताबिक, सूखाग्रस्त वर्ष में उत्तरी भारत में भूजल का दोहन 100 क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाता है। वैज्ञानिकों के कहना है कि सेंट्रल ग्राउंडवॉटर बोर्ड ऑफ इंडिया के पहले के अनुमानों से तुलना करें तो भूजल की पंपिंग का काम 70 फीसदी तेज गति से किया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक 1990 दे दशक में करीब 172 क्यूबिक किलोमीटर पानी की पंपिंग की गई थी। तिवारी ने कहा, हमें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है कि रीजन में कितना भूजल बचा है, लेकिन हम इतना जरूर कह सकते हैं कि तस्वीर बेहद खराब है। जनसंख्या बढ़ने के साथ जल संसाधनों में कमी आ रही है। हर साल उत्तरी भारत में जलस्तर 10 सेंटीमीटर घट रहा है। तिवारी ने बताया, दिल्ली जल संकट का केंद्र बना हुआ है, जिसकी वजह से पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

पोषण खत्म हो रहा, मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है, जिनके भयावह परिणाम हो सकते हैं।

NEWSTODAYJHARKHAND.COM

Leave a Reply

Your email address will not be published.