आदि शिल्पकार भगवान विश्कर्मा का पूजनोत्सव कल, बाजारों में भारी भीड़…..

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धनबाद।

आदि शिल्पकार भगवान विश्कर्मा का पूजनोत्सव कल, बाजारों में भारी भीड़…..

धनबाद। हर साल की तरह इस बार भी विश्व के आदि शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा पूजा का त्योहार 17 सितंबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि कल के दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए अस्त्रों, शस्त्रों, भवनों और मंदिरों का निर्माण किया था। बताते चलें कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तिथि दशमी तारीख 17 को भगवान विश्वकर्मा जयंती मनायी जाती है, यह जयंती सिर्फ 17 तारीख को ही मनायी जाती है, इस दिन औजारों की पूजा की जाती है, यह पर्व बडी-बडी कंपनियों में, फैकट्रियों में, बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, इस दिन भगवान विश्वकर्मा की झांकी निकाली जाती है, इस दिन बडी-बडी मशीन, बस, ट्रक, मोटर, जहाज, रेल, मोटर साइकिल, आदि बडे वाहनों की पूजा होती है, इस प्रकार विश्वकर्मा जयंती संपूर्ण भारत वर्ष में उत्साह पूर्वक मनायी जाती है। विश्व के प्राचीनतम तकनीकी ग्रंथों का रचयिता भी विश्वकर्मा को ही माना गया है। इन ग्रंथों में न केवल भवन वास्तु विद्या, रथादि वाहनों के निर्माण, बल्कि विभिन्न रत्नों के प्रभाव व उपयोग आदि का भी विवरण है। देव शिल्पी के विश्वकर्मा प्रकाश को वास्तु तंत्र का अपूर्व ग्रंथ माना जाता है। इसमें अनुपम वास्तु विद्या को गणितीय सूत्रों के आधार पर प्रमाणित किया गया है।

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ऐसा माना जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाए, भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हैं। भगवान विश्वाकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है। पौराणिक युग के अस्त्र और शस्त्र भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित हैं। वज्र का निर्माण भी उन्होने ही किया था। भगवान विश्वकर्मा को वास्तु शास्त्र और तकनीकी ज्ञान का जनक माना जाता है। पौराणिक साक्ष्यों के मुताबिक, स्वर्गलोक की इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, असुरराज रावण की स्वर्ण नगरी लंका, भगवान श्रीकृष्ण की समुद्र नगरी द्वारिका और पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर के निर्माण का श्रेय भी विश्वकर्मा को ही जाता है।

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