अपने बेबाक बोल के लिए मशहूर हैं ददई दुबे इन दिनों दिल्ली के गलियारें में बिता रहे अपना वक्त जाने पूरी खबर

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(धनबाद)

अपने बेबाक बोल के लिए मशहूर हैं ददई दुबे इन दिनों दिल्ली के गलियारें में बिता रहे अपना वक्त जाने पूरी खबर…………..!

छोटे खान।

(धनबाद)–इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद धनबाद ददई दुबे कल देर शाम दिल्ली में झारखंड कांग्रेस प्रभारी आर पी एन सिंह से दिल्ली में मिले, उनकी ये मुलाकात काफी लंबी चली जिसमे आगामी चुनाव को लेकर चर्चा भी हुई, फिलहाल ददई दुबे कांग्रेस के अंदरूनी खींचतान में सब पर भारी है,,,,,

साथ ही जमाने के साथ चलने के लिए ददई दुबे फेसबुक, ट्विटर और व्हात्सप्प भी इस्तेमाल कर रहे है, जिसपे लगातार काफी तीखे हमले वर्तमान सांसद श्री पी एन सिंह पे वो कर रहे है, ददई दुबे के फेसबुक पेज पर लगातार अपडेट आ रहे है, उनकी तैयारी किस ओर इशारा कर रही है ,ये तो वक़्त ही बताएगा।

धनबाद:दिल्ली:पूर्व सांसद अपनी काबिलियत के दम पर मैदान में टिके है, में आप को बता दु की ददई दुबे ऐसे इन्शान है जिसे धनबाद का हर बच्चा बच्चा जनता है। 3 बार की विजेता सांसद रीता वर्मा को मात देकर पहली बार धनबाद के सांसद बने कोई सपनो भी नही सोचा था रीता वर्मा को ददई दुबे मात दे देगा। BJP का विजय रथ रोकने वाले ये सांसद बने थे काँग्रेस की ओर से काफी लोकप्रिय है पूर्व सांसद ददई दुबे।

अभी भी इस उम्र में वो हार नही माने मैदान में डटे हुए है। अब देखना होगा काँग्रेस क्या इन्हें फीर मौका देते है। अगर काँग्रेस इन्हें मौका देती है तो उलट फेर करने में काफी माहिर है पूर्व सांसद ददई दुबे।

जाने ददई की पूरी कहानी……. !

झारखंड की सियासत में पलामू के चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे का जिक्र न हो ऐसा नहीं हो सकता। अपनी बेबाक छवि के लिए प्रसिद्ध ददई दुबे सूबे की सियासत में अलग ही पहचान है। 1970 की दशक से इंटक से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले ददई दुबे कांग्रेस के संयुक्त बिहार में कद्दावर नेताओं में शुमार थे। 1985-95 तक विश्रामपुर से लगातार विधायक रहे, बिहार में राबड़ी सरकार में मंत्री रहे, फिर 2000-2004 तक झारखंड विधानसभा में विधायक रहे। इसके बाद 2004 में धनबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर जीत दर्ज की और सांसद बने।

अंतिम बार झारखंड के हेमंत सरकार में मंत्री रहे। हालांकि इस सरकार में रहते हुए उन्होंने सीएम हेमंत सोरने के खिलाफ ही आवाज बुलंद कर दी जिसके कारण उन्हें अपना मंत्री पद खोना पड़ा। कांग्रेस में तरजीह नहीं दिए जाने से नाराज होकर उन्होंने 2014 में पार्टी से 40 साल पुराना रिश्ता तोड़कर तृणमूल का हाथ थाम लिया था और धनबाद लोकसभा सीट से किस्मत भी आजमाया पर जीत नहीं मिली। कुछ समय बाद एक बार फिर कांग्रेस में ही लौट आए।

ददई दुबे अपने बेलाग-लपेट दिए गए बयानों के लिए जाने जाते हैं, इसी कारण कभी-कभी उन्हें सियासी नुकसान भी झेलना पड़ता है लेकिन उनकी जमीनी पकड़ के कारण ही वे पलामू सहित धनबाद जैसे सीट से भी जीतने में कामयाब रहे। श्रमिक नेता के रूप में आज भी उनकी खास पहचान है, इसके लिए वे लगातार मजदूरों के बीच उनकी लड़ाई भी लड़ते रहे हैं, और अभी भी सक्रिय हैं।



न्यूज टुडे झारखंड बिहार।

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